स्वतंत्रविचार 24 (रिपोर्ट :-- वकील अहमद अंसारी)
कैसा डेमोक्रेसी ? जो बहुत कुछ किया उसे कुछ नहीं और जो कुछ नहीं करता उसे बहुत कुछ -- निसार अहमद
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रसड़ा (बलिया) हर वर्ग के समाज के प्रभावशाली लोकप्रिय अनुभवी नेता व प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव निसार अहमद ने एक राजनीतिक विषयों पर चर्चा के दौरान कहा कि यह अजीब विडंबना है कि इस डेमोक्रेसी के दौर में जिसने बहुत कुछ किया और करता है उसको कुछ नहीं मिल पाता और जिसने कुछ नहीं किया और ना ही करता है उसे बहुत कुछ मिलता जा रहा है। इसी बीच उन्होंने कहा कि भारत के आठवें प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 7 अगस्त 1990 को मंडल कमीशन लागू करने की घोषणा करके देश के भारी जनसंख्या वाले ओबीसी के लिए तरक़्क़ी के रास्ते खोल दिए, जिसकी मांग डाक्टर राममनोहर लोहिया जी किया करते थे । आदरणीय लोहिया जी का नारा था "सोशलिस्टों ने बांधी गांठ , पिछड़े पाएं सौ में साठ"।
जिस विशाल समुदाय के लिए स्व. वीपी सिंह जी ने अपने ही जाति समुदाय से इतनी बड़ी दुश्मनी मोल ली और जिन लोगों को अधिकार दिलाने के कारण उनको सत्ता तक गवाना पड़ा। दुख तो तब होता है जब वही समुदाय जिनके लिए उन्होंने सब कुछ सहा वह भी उन्हें सम्मान नहीं देते हैं । आज भी यह गंभीर सवाल खड़ा है कि इतना लाभ उठाने वाले पिछड़े वर्ग के लोगों ने उन्हें गर्मजोशी के साथ अपनाया क्यों नहीं ? आखिर ऐसी कुंठित मानसिकता इस समाज के लोगों में क्यों आ गई ? जिस समाज के लिए जहां उस विराट व्यक्तित्व विश्वनाथ प्रताप जी ने पिछड़े समाज को आरक्षण देकर इतना बड़ा कार्य किया, आखिर फिर यह समाज उनके साथ खुले मन से आभार क्यों नहीं जताता ? जबकि स्व. वीपी सिंह जी को भारत रत्न से नवाज़ा जाना चाहिए परंतु खेद का विषय है कि इसकी मांग तक उन जिम्मेदार लोगों द्वारा अभी तक इसकी मांग तक नहीं उठाई गई । मंडल आयोग के हिमायती नेता और लाभ उठाने वाले लोग भी वीपी सिंह जी को आज भुला बैठे। यहां तो ऐसे तमाम लोग हैं जिन्होंने बहुत कुछ नहीं किया फिर भी उन्हें बड़े बड़े सम्मान मिलता जा रहा है। स्व. वीपी सिंह जी ही ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी को भारत रत्न से नवाज़ा था और देश के संसद सेंट्रल हॉल में उनकी प्रतिमा स्थापित करते समय उन्होंने कहा था कि जब दिल में जगह होती है तो दीवार पर भी जगह मिल जाती है। उन्होंने बाबा साहेब को यह सम्मान देकर लोगों को बताया कि राजा क्या होता है ? पर इतना करने के बाद भी क्या विश्वनाथ प्रताप सिंह जी को वो सम्मान मिला, जिसके वो हक़दार हैं ? आज लोगों के इस भयंकर चुप्पी पर हमारा यह सवाल पिछड़े तथा शोषित समाज के बुद्धिजीवियों,और नेताओं से बराबर बना रहेगा ?








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