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सालाना उर्स के मौके पर दाता साहब के मजार पर चादर पोशी की रश्म की गई अदा।

 


सालाना उर्स के मौके पर दाता साहब के मजार पर चादर पोशी की रश्म की गई अदा।

सिकन्दरपुर (बलिया)। नगर के मोहल्ला बड्ढा, मुड़ियापुर स्थित हजरत हाशिम शाह चहारजर्ब दाता साहब के नाम से मशहूर (दाता साहब) के सालाना उर्स के मौके पर बुधवार को मोहल्ला मुड़ियापुर स्थित उनके मजार पर सुबह 10 बजे से उनके शहन में कुल शरीफ तथा मिलाद के साथ शुरुआत की गई। मुल्क में अमन शांति की दुआ मांगी गई। रात को ईशा की नमाज के बाद दाता साहब के मजार पर चादर पोशी की रश्म अदा की गई। उनके उर्स के मौके पर सुबह से ही क्षेत्र भर के आए हुवे नातख़्वाहों ने नातख़्वानी व मिलाद पढ़ा तथा कारी फिरोज अख्तर नें (गागर व शीरनी) फ़ातिहा पढ़ा और मुल्क की सलामती की दुआ मांगीं। ततपश्चात उनके आस्ताने पर अकीदतमंदों का आना जाना शुरू हो गया, जो पूरे दिन भर जारी रहा। शाम होते ही हजारों अकीदतमंदों ने उनके मजारे पाक पर हाजिरी लगाई। चादर पोशी की, फातिहा पढ़ी और खुद के साथ ही कौम व मुल्क में अमन, शांति, मिल्लत व सलामती के लिए दुआ मांगी।वहीं जायरीन द्वारा ज्यारत करने व फातिहा पढ़ने का जो सिलिसला शुरू हुआ वह देर रात तक चलता रहा। हाजिरी देने वाले जायरीन में जहां महिलाओं की संख्या पुरुषों से कम नहीं थी। वहीं पड़ रही ठंड पर लोगों की आस्था भारी पड़ी और महिला पुरुष व बच्चों की भीड़ देर रात तक मजार प्रांगण में जमी रही। इस मौके पर उर्स कमेटी की तरफ से जहां जायरीन के सुविधार्थ नाना व्यवस्थाएं की गई थीं वहीं आयोजित मेला में भी हजारों लोगों ने भाग लेकर अपनी आवश्यकता के सामानों की खरीदारी की। वहीं रात्रि को अकीदतमंदों नें उनके मजार पर पहुंच कर चादर पोशी की और दुवाएं मांगी। रात्री को मोहल्ला स्थित दरगाह हजरत सय्यद शाहवाली कादिरी में मिलाद शरीफ के आयोजन के साथ ही अकीदतमंदों को गुदड़ शरीफ की जियारत कराई गई, जहां देर रात तक काफी भीड़ जमी रही। ऐतिहासिक गुद्दड़ शरीफ़ की ज़ियारत सन1658ई0 से परम्परागत ढंग से आज भी दरगाह हज़रत सय्यद शाह वली कादरी में होती चली आ रही है, जिसमें दूर दराज इलाके से जायरीन बड़ी संख्या में पहुंच कर गूद्दड़ शरीफ का जियारत करतें हैं और अपनीं मुरादें मांगते हैं। इस वर्ष यह 363 वीं ज्यारत थी।

रिपोर्ट :-- रजनीश कुमार