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जिला अस्पताल में बच्चों के टेढ़े-मेढ़े पंजे (क्लबफुट) का किया गया नि:शुल्क इलाज।

 


- जनपद में अभी तक 10 बच्चों ने पाया निःशुल्क इलाज का लाभ।

- 0 से 2 वर्ष तक के बच्चे ले सकते हैं इलाज का लाभ।

- जिला अस्पताल में 10 जन्मजात मुड़े हुये बच्चों के पंजों का चल रहा है निःशुल्क इलाज।

- मिरेकल फीट इंडिया द्वारा विशेष प्रकार के जूते (ब्रेसेज) बच्चों को दिया जाता है नि:शुल्क।

(बलिया) जिलेवासियों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम वरदान साबित हो रहा है। इस कार्यक्रम से जहां नई पौध को नया जीवन मिल रहा है वहीं उनके अभिभावकों की जेब पर भी कोई अतिरिक्त असर नहीं पड़ रहा है। इस योजना के तहत इस वर्ष अब तक 10 बच्चों का नि:शुल्क इलाज किया जा चुका है। 
 उन 10 बच्चों में से 3 बच्चों का टेनोटामी डॉ० संजय श्रीवास्तव के द्वारा सफल रूप से किया गया। तथा 2 बच्चे अभी प्लास्टर (पोंसेटी मेथड)  पर चल रहे हैं।  डॉ० संजय श्रीवास्तव ने बताया कि जल्द ही इन दोनों बच्चों का टेनोटॉमी किया जायेगा और फिर ये बच्चे ब्रेस (विशेष प्रकार के जूते ) पहन पाएंगे। जिला अस्पताल में कार्यरत हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ० संजय श्रीवास्तव  ने इस प्रक्रिया के बारे में बताया कि जिन बच्चों  के पैर का पंजा अंदर की ओर मुड़ा होता है। उन बच्चों का इलाज पोनसेटी मेथड के द्वारा सही किया जा सकता है। उन बच्चों को पहले प्लास्टर लगाया जाता है तथा फिर उन बच्चों के टेंडेंट को रिलीज करने के लिए उनका टेनोटोमी किया जाता है फिर उन बच्चों को विशेष प्रकार के जूते प्रदान किए जाते हैं जोकि  मिरेकल फीट इंडिया के द्वारा नि:शुल्क दिया जाता है। 
जिला अस्पताल में कार्यरत हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ० संतोष चौधरी  ने बताया कि क्लब-फुट जन्म के समय से ही बच्चों के पैर का पंजा मुड़ा हुआ होता है। उन बच्चों के पैरों के उपचार के लिये पोंसेटी तकनीकी के सहयोग से क्लब-फुट का उपचार संभव है। इसमें धीरे-धीरे बच्चे के पैर को बेहतर स्थिति में लाया जाता है और फिर इस पर एक प्लास्टर चढ़ा दिया जाता है, जिसे कास्ट कहा जाता है। यह हर सप्ताह 5 से 8 सप्ताह तक के लिए दोहराया जाता है। आखिरी कास्ट पूरा होने के बाद, अधिकांश बच्चों के टेंडन को ढीला करने के लिए एक मामूली माइनर ऑपरेशन की आवश्यकता होती है। यह बच्चे के पैर को और अधिक प्राकृतिक स्थिति में लाने में मदद करता है। जिससे पैर अपनी मूल स्थिति पर वापस न आ जाये।
मिरेकल फीट इंडिया के प्रोग्राम एक्जीक्यूटिव आनंद कुमार ने बताया कि 0 - 2 वर्ष तक के बच्चे इस नि:शुल्क इलाज का लाभ ले सकते हैं   हमारे संस्था के द्वारा बच्चों के प्लास्टर में लगने वाला जिप्सोना तथा और ब्रेस ( विशेष प्रकार का जूता ) नि: शुल्क प्रदान किया जाता है। कभी-कभी इस प्रक्रिया के काम नहीं करने का मुख्य कारण यह होता है कि ब्रेसिज़ (विशेष प्रकार के जूते) लगातार उपयोग नहीं किये जाते हैं। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आपका बच्चा लंबे समय तक विशेष जूते और ब्रेसिज़ आमतौर पर तीन महीने के लिए पूरे समय और फिर रात में भी पहनाने होते हैं। 
क्या कहा  लाभार्थियों ने:-
नाम- आलोक, पिता का नाम- नरसिंह ,ग्राम- कोदाई, ब्लॉक -नगरा  ने बताया की जब हमारा बच्चा पैदा हुआ  तो पैर देखकर हम लोग बहुत चिंतित हो गए थे। लेकिन जब पता चला कि जिला अस्पताल में इसका नि:शुल्क इलाज होता है तो हम बहुत खुश हुए और जिला अस्पताल आकर बच्चे के पैर का इलाज कराना शुरू किए। 
अरनीक,पिता का नाम- पंकज, पता - परसादपुर , ब्लॉक - पंदह ने बताया कि हमारा बच्चा जब पैदा हुआ तो हम खुश होने की वजह अत्यधिक चिंतित थे। परंतु जब हमे पता चला कि जिला अस्पताल में ऐसे बच्चों का इलाज चल रहा तो हम वहाँ गए, डाक्टर को दिखाने के बाद वहाँ से हमारे बच्चे के पैर में सुधार दिखना शुरू हो गया और अब मेरे बच्चे का पैर एकदम ठीक है।


रिपोर्ट :-- ज्ञान प्रकाश