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जब‌ देश कोरोना से जूझ रहा था,तब पत्रकार सड़कों पर उतर कर देश हित में लगे थे -- उमाशंकर सिंह

 


रसड़ा (बलिया) स्थानीय नगर के अग्रवाल धर्मशाला रसड़ा में मंगलवार को भारतीय पत्रकार संघ तहसील इकाई रसड़ा द्वारा शहीद पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी जी की जयंती मनाई गई। जयंती कार्यक्रम के अवसर पर "वर्तमान पत्रकारिता पर एक नजर" शीर्षक नाम से गोष्ठी का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत उनके तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पत्रकारों ने कहा कि पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी एक निर्भीक निष्पक्ष व निडर पत्रकार थे। 
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निष्पक्ष व निडर पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी के विचार व लेखन एक यादगार है
---------------------------------------------------------------स्व.विद्यार्थी जी के विचार व लेखनी व जीवन हम सबके लिए एक यादगार है , उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओ ने कहा कि स्व. विद्यार्थी जी का जन्म 26 अक्टूबर 1890 को इलाहाबाद में हुआ था। देश की आजादी में उनकी भूमिका को लोग आज भी याद करते हैं। वे उच्च कोटि के पत्रकार व साहित्यकार थे, जिनका पहला आलेख आत्मोसर्ग चर्चित पत्रिका 'सरस्वती" में छपा था, जिसे प्रबुद्ध लोगों के बीच बहुत प्रसिद्धि मिली। काफी दिनों तक "सरस्वती" पत्रिका में वे काम करते रहे फिर महामना मदन मोहन मालवीय की पत्रिका "अभ्युदय' में उप संपादक भी बने। स्व. विद्यार्थी जी ने 1913 में कानपुर से साप्ताहिक पत्रिका"प्रताप" स्वयं निकालना शुरू किया, जो क्रांतिकारी विचारों एवं स्वतंत्रता की अभियुक्ति का माध्यम बना। जनता की पहल पर फिर यह पत्रिका दैनिक बन गया। स्व. गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपना पूरा जीवन भारत मां के नाम कर दिया। इस महामानव की मृत्यु 25 मार्च 1931 को हो गई। लेकिन उनकी शिक्षा और विचार आज भी हमारे लिए प्रेरणा के श्रोत हैं। स्व.गणेश शंकर विद्यार्थी जी हिंदी के पत्रकार एवं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही थे तथा एक सुधारवादी नेता के रूप में भी प्रसिद्ध थे। गणेश शंकर विद्यार्थी एक पत्रकार के रुप में राजनीति लेखन को महत्व देते थे तथा समाचार पत्र के माध्यम से स्वतंत्रता आन्दोलन में प्राण फूंके थे। 
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जब देश गुलाम था तब पत्रकारिता आज़ाद थी, आज देश आज़ाद है तो पत्रकारिता गुलाम -- संजय पांडेय
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इस अवसर पर भारतीय पत्रकार संघ के जिलाध्यक्ष संजय पांडेय ने कहा कि आज की पत्रकारिता बेहद जटिल व चुनौती पूर्ण हो चुकी है, सभी पत्रकार को काफी सतर्क रहने की जरूरत है। जब देश गुलाम था तब पत्रकारिता आजाद था और आज जब देश आज़ाद है,तो पत्रकारिता गुलाम है। इस अवसर पर  मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकार अपनी जान की बाजी लगाकर पत्रकारिता करता है। जब देश कोरोना काल में जूझ रहा था,तब मात्र पत्रकार ही थेे‌ जो अपनी जान को जोखिम ‌‌‌‌‌में डालकर नि:स्वार्थ भाव से सड़कों पर उतर कर देश हित में कार्य करते थे। इसी क्रम में विधायक उमाशंकर सिंह ने रसड़ा में पत्रकारों के बैठने हेतु समुचित व्यवस्था का आश्वासन दिया तत्पश्चात निष्पक्ष व उत्कृष्ट पत्रकारिता करने वालों को डायरी और कलम भेंट कर सम्मानित किया। इस गोष्ठी कार्यक्रम में यूपी बड़ौदा बैंक ने सीनियर शाखा प्रबंधक अमर सिंह कुशवाहा, इलाहाबाद कोचिंग के व्यवस्थापक कौशल गुप्ता, सुनील सरदासपुरी, सुरेश तिवारी ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में सम्मिलित अतिथियों को भारतीय पत्रकार संघ रसड़ा इकाई ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में अतिथि विनय जायसवाल,विशिष्ट अतिथि संजय पाण्डेय, संतोष सिंह आदि ने शिरकत की। गोष्ठी में मुख्य रूप से पत्रकार उमाकांत विश्वकर्मा,सुमित गुप्ता, आदित्य सोनी, इश्तियाक अहमद, रमाकांत सिंह, कृष्णा शर्मा,सीताराम शर्मा,आशु खरवार , नेहाल अख्तर, राघवेंद्र गौतम वह समाजसेवी राजेश जायसवाल, सुनील सरदासपुरी, अविनाश सोनी,अंजनी कुमार पाण्डेय व यूपी बड़ौदा बैंक के शाखा प्रबंधक अमर सिंह‌ कुशवाहा ,के.के. पाण्डेय,ओमप्रकाश पाण्डेय के साथ अन्य लोग भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन भारतीय पत्रकार संघ रसड़ा तहसील अध्यक्ष रवि आर्य ने की।



रिपोर्ट :--- वकील अहमद अंसारी