स्वतंत्रविचार 24 ( न्यूज़ डेस्क बलिया)
स्वच्छता और सावधानी से डेंगू और चिकनगुनिया, बीमारी से बचा जा सकता है।
मऊ (उत्तर प्रदेश):
मानसून के बाद होने वाली प्रमुख बीमारियों से जिले के सभी ब्लाकों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और उप केन्द्रों को निर्देशित किया गया है कि सभी अपने क्षेत्र के गावों के लोगों को स्वच्छता व रोगों को लेकर जागरूक करें, जिससे समाज में लोगों को बीमारियों से बचाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग बीमार पड़ने पर सरकारी केन्द्रों पर बेहतर चिकित्सा मुहैया कराने के लिए दृढ़ संकल्पित है। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ नरेश अग्रवाल दी।सीएमओ डॉ. अग्रवाल ने बताया कि बरसात या उसके बीतने के बाद डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। इन दोनों ही बीमारियों के जनक मच्छर होते हैं। दोनों बीमारियों के प्रमुख लक्षण बुखार है, परंतु कई बार लोगों में डेंगू और चिकनगुनिया को लेकर भ्रम की स्थिति हो जाती है। अगर सही समय पर लक्षणों को पहचानकर इन बीमारियों का समय पर बेहतर इलाज न शुरू किया जाए, तो दोनों ही बीमारियां नुकसानदेह साबित होती हैं। इन दोनों बीमारियों डेंगू और चिकनगुनिया में अन्तर है, अतः इसके बारे में सभी को जानकारी होना जरूरी है। यह दोनों बीमारियाँ आसपास जल जमाव और गंदगी के कारण होती हैं। इन रोगों के लिये सभी सीएचसी और पीएचसी और सदर अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टर परामर्श और जाँच, इलाज तथा दवाएं सभी निःशुल्क उपलब्ध हैं।अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी नोडल वेक्टरबार्न डिजीज डॉ आरवी सिंह ने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया दोनों ही बीमारियां मच्छरों के काटने से होती हैं। जल जमाव और गंदगी में पैदा होते हैं इनको फैलाने वाले मच्छर। चिकनगुनिया का कारण जीनस अल्फावायरस होता है, जो एडीज प्रजाति के एजिप्टी और एल्बोपिक्टस मच्छरों के काटने से फैलता है, जबकि डेंगू का कारण जीनस फ्लेवीवायरस होता है, जो एडीज प्रजाति के केवल एजेप्टी वायरस के कारण फैलता है। दोनों ही बीमारियों के शुरुआती लक्षण एक समान होते हैं इसलिए कई बार इनमें लक्षणों के आधार पर अंतर कर पाना मुश्किल होता है। हालांकि इन लक्षणों के आधार पर इनका पता लगाया जा सकता है। डॉ आरवी सिंह ने बताया कि डेंगू की शुरूआत के लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द और पीठ में दर्द से होती है। शुरू के तीन से चार घंटों तक जोड़ों में भी बहुत दर्द होता है। आंखें लाल हो जाती हैं। डेंगू बुखार दो से चार दिन तक रहता है और फिर धीरे धीरे तापमान नार्मल हो जाता है। बुखार के साथ-साथ शरीर में खून की कमी हो जाती है। शरीर का तापमान 104 डिग्री हो जाता है और ब्लड प्रेशर भी नार्मल से बहुत कम हो जाता है। डॉ आरवी सिंह ने कहा जब कि चिकनगुनिया में तेज बुखार होना। तेज बुखार होने का पैर, हाथ और कलाई में हल्के सूजन के साथ गंभीर दर्द होना गंभीर पीठ दर्द, सिरदर्द थकान के साथ मांसपेशी में दर्द, त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते का होना जो आमतौर से 48 घंटों में दिखाई पड़ते हैं। गले में खराश होना आंखों में दर्द और कंजेक्टिवाइटिस होना। जिला मलेरिया अधिकारी बेदी यादव ने बताया कि जन समुदाय अपने घर के आसपास साफ-सफाई रखें, जल भराव न होने दें, क्योंकि बरसात के समय में गड्ढों में, बड़े बर्तनों में, टायरों में जल जमा हो जाता है। ज्यादा दिन तक एक ही स्थान पर इकट्ठा रहने के कारण पानी में मच्छरों के लार्वा पनपते हैं। हर शनिवार और रविवार खुली जगहों में जमा पानी को नष्ट करें।







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