स्वतंत्रविचार 24 (रिपोर्ट :-- ओम प्रकाश वर्मा)
नगरा (बलिया)। शिक्षा जगत में अपनी पैठ बनाने वाले क्षेत्र के नरहेजी संस्थान का 75 वां स्थापना दिवस एवं बलिया बलिदान दिवस संयुक्त रूप से मनाया गया। संस्थान के पैरामेडिकल कॉलेज के प्रांगण में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ख्याति प्राप्त साहित्यकार जनार्दन राय ने संस्थापक सदस्य स्व हंसनाथ पांडेय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शुभारम्भ किया।
मुख्य अतिथि साहित्यकार जनार्दन राय ने कहा कि अच्छा कार्य करने के लिए शारीरिक एवं आर्थिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी है। उन्होने संस्थापकों को नमन करते हुए नरहेजी संस्थान के प्रगति की कामना की। शिक्षाविद् डॉ विजय नारायण सिंह उर्फ गोपाल जी ने उपस्थित लोगो को संबोधित करते हुए नरहेजी संस्थान के इतिहास की चर्चा की तथा कहे कि इस संस्थान की नीव 19 अगस्त 1952 को रखी गई थी। शिक्षा के महत्व को समझते हुए उस समय स्व हंसनाथ पांडेय उर्फ गोरू चरवहवा बाबा ने अपनी कीमती भूमि नरहेजी संस्थान को दान दिया था। पूर्वजों के आशीर्वाद एवं क्षेत्र के बौद्धिक लोगो के सहयोग से आज यह संस्थान नित निरन्तर प्रगति पर है। बलिया बलिदान दिवस पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश को आजाद कराने में बलिया की अहम भूमिका रही है। बलिया को मंगल पांडेय एवं चित्तू पांडेय ने क्रांति की लौ जलाकर आजाद कराया। उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। इस मौके पर डॉ विजय नारायण सिंह ने मुख्य अतिथि जनार्दन राय व विशिष्ट अतिथि सुभाष इंटर कॉलेज ताड़ी बड़ा गांव के प्रधानाचार्य धर्मनाथ सिंह व एसबीआई के अवकाश प्राप्त प्रबन्धक लल्लन पांडेय सहित पांच दर्जन से उपर गणमान्य नागरिकों को अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। वहीं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं को प्राचार्या डॉ सुशीला सिंह ने मेडल से सम्मानित किया। महर्षि बाल्मीकि सीनियर सेकेंडरी स्कूल व नरहेजी इंटर कॉलेज के दो दर्जन से अधिक छात्र छात्राओं ने वंदना, स्वागत गीत,भक्ति गीत, देशभक्ति गीत, नृत्य, बेटी बढ़ाओ बेटी बचाओ लघुनाटिका, भाषण व पिरामिड का मनमोहक प्रस्तुति दी। लल्लन पांडेय, धर्मनाथ सिंह, सुरेन्द्र सिंह, शिवानंद श्रीवास्तव, वकील यादव सहित दो दर्जन लोगो ने अपने विचार व्यक्त किए। राजेश सिंह, प्रदीप मिश्र, डॉ अच्युतानंद चौबे, सुनील राय, ब्रजेश पांडेय आदि व्यवस्था के संचालन में जुटे रहे। संचालन डॉ कृष्ण मोहन सिंह व बीएड विभाग की कक्षाध्यापिका काव्या सिंह ने किया।







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