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हड्डी तोड़ बुखार को ही “डेंगू” कहा जाता है: सीएमओ

 


स्वतंत्रविचार 24 ( न्यूज़ डेस्क बलिया )

हड्डी तोड़ बुखार को ही “डेंगू” कहा जाता है: सीएमओ

 डेंगू की “एलाईजा” जाँच रिपोर्ट सही होती है, साढ़े तीन घंटे में आती है जाँच रिपोर्ट।

मऊ (उत्तर प्रदेश)। 
एडीज मच्छर के काटने से डेंगू होता है। मच्छर के काटने के 5-6 दिन बाद ही इसके लक्षण दिखते हैं। इसका सबसे खतरनाक लक्षण हड्डियों में दर्द शामिल है। इसी कारण इसको हड्डी तोड़ बुखार भी कहते हैं। इसलिए सतर्क रहें। यह कहना है मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ नरेश अग्रवाल का।

डॉ.अग्रवाल ने बताया कि इसके मच्छर खासतौर पर बारिश के आसपास बढ़ते हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर भ्रमण कर साफ-सफाई, सोर्स रिडक्शन, लार्वीसाइड छिड़काव व फागिंग आदि कार्य नियमित रूप से किया जा रहा है।

सीएमओ ने डेंगू से बचाव के उपाए बताये, यह एडिज मच्छर के काटने से होता है जो दिन के समय काटता है। इसलिए दिन में भी मच्छरों से बचाने की क्रीम लगाकर रखें। मच्छरों काटने वाली जगहों पर शरीर को ढँक कर रखें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, अपने पास कूलर, गमले और टायर आदि में पानी ना रहने दें। कूलर या पानी वाली जगहों पर किरासन तेल या मच्छर भगाने का पाउडर छिड़काव करें। पानी की टंकियों को सही तरीके से ढंककर रखें। खिड़की और दरवाजों में जाली लगवाएं। घर के अंदर और आस-पास सफाई रखें। डेंगू के लक्षणों में त्वचा पर चकत्ते, तेज सिर दर्द, पीठ दर्द, आंखों में दर्द, तेज़ बुखार, मसूड़ों से खून बहना, नाक से खून बहना, जोड़ों में दर्द, उल्टी, डायरिया है। डेंगू का नि:शुल्क जाँच और इलाज जिला अस्पताल समेत सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा किया जाता है। 

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निरन्तर की जा रही है निगरानी:डॉ. आरवी सिंह

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी नोडल वेक्टर बार्न डॉ आरवी सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की जनपद स्तरीय एवं ब्लाक स्तरीय रैपिड रिस्पांन्स टीम द्वारा निरोधात्मक कार्यवाही के साथ जनजागरूकता, स्वास्थ्य शिक्षा, सोर्स रिडक्शन,ज्वर पीड़ित मरीजों के रक्त नमूनों की जाँच, क्लोरीन की गोली का वितरण, ब्लीचिंग पाउडर, नालियों में लार्वीसाडल छिड़काव किया जा रहा है, प्रत्येक ग्राम में नियमित साफ-सफाई, नालियों की सफाई हेतु जिला पंचायत राज अधिकारी मऊ व समस्त खण्ड विकास अधिकारी को भी अवगत कराया गया है। साथ ही ब्लाक स्तरीय एवं जनपद स्तरीय रैपिड रिस्पांस टीम द्वारा निरन्तर निगरानी की जा रही है, जनपद में किसी भी प्रकार का कोई ज्वर पीड़ित मरीज प्रकाश में आता है तो तत्काल सीएमओ आफिस वेक्टर बार्न में सूचित करें।

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जरूरी नही डेंगू हो, वायरल फीवर भी हो सकता है - बेदी यादव

जिला मलेरिया अधिकारी बेदी यादव ने बताया कि इस समय वायरल की बहुत सी खबरें आ रही हैं। जरुरी नहीं की वह डेंगू हो, लेकिन उससे किसी को डरने की जरूरत नहीँ है। बल्कि कुछ सावधानी जरुरी है। इसकी एलाइजा जाँच कराएं जो जाँच मऊ और आज़मगढ़ के सदर अस्पताल एसआरएल लैब में निःशुल्क है। जिसने भी डेंगू की कार्ड द्वारा जाँच कराया है तो वह भी मऊ या आजमगढ़ में जाकर निःशुल्क एलाइजा जाँच करा कर डेंगू की पुष्टि कर सकता है।
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