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रामलीला में सूर्पनखा की नाक कटने,सीता हरण व जटायु प्रसंग का मंचन किया गया।

 

स्वतंत्रविचार 24 (रिपोर्ट :-- पियुष सिंह)

रामलीला में सूर्पनखा की नाक कटने,सीता हरण व जटायु प्रसंग का मंचन किया गया।

रतसर (बलिया) कस्बे में चल रही बीका भगत के पोखरे पर रामलीला समिति के तत्वाधान में सोमवार को सूर्पनखा की नाक कटने,सीताहरण व जटायु प्रंसग का मंचन किया। पंचवटी में रावण की बहन सूर्पनखा विचरती हुई पहुंचती है। राम लक्ष्मण को देखकर मोहित हो जाती है। वह राम व लक्ष्मण से बारी-बारी से विवाह का प्रस्ताव देती है। दोनों मना कर देते हैं। कहते हैं कि उनकी शादी हो चुकी है,ऐसे में दूसरी शादी नहीं कर सकते।वह गुस्से में सीता की ओर झपटती है तो लक्ष्मण जी उसका नाक काट देते हैं। वह रावण के पास जाती है और आपबीती बताती है। रावण सोच में पड़ जाता है। वह सोचता है कि खरदूषण का मारा जाना कोई साधारण बात नहीं है।वह श्रीराम से बैर बांधकर पूरे कुल का उद्धार करने की सोचता है। अपने मित्र मारीच को माया मृग बनकर पंचवटी में जाने को कहता है। सीता मैया श्रीराम को उस मृग को लाने को कहती हैं। राम और लक्ष्मण माया मृग के पीछे चले जाते हैं। इसी बीच रावण साधु का वेश बनाकर आता है और सीता का हरण कर ले जाता है। वहीं व्यास गद्दी से रामचरित मानस की संगीतमय चौपाई सुनकर पूरा पंडाल भक्तिमय हो जाता है।