स्वतंत्रविचार 24 (रिपोर्ट :-- पियुष सिंह)
लुप्त हो रहे नागपंचमी पर होने वाले पारंपरिक खेल।
रतसर (बलिया) एक दशक पूर्व तक नागपंचमी पर क्षेत्र के अखाड़े और पारंपरिक प्रदर्शन की तैयारियां तेज हो जाती थी। कुश्ती, कबड्डी,डंबल,गदा फेरने की प्रतियोगिता होती थी। इन खेलों में युवा वर्ग तो रुचि लेता ही था पर बुजुर्ग भी पीछे नही रहते थे। अब तमाम पारंपरिक खेल लुप्त होते जा रहे है। बरसात शुरू होते ही गांव-गांव अस्थाई अखाड़े खोद दिए जाते थे। इनमें लोग रियाज करते थे। इसके अलावा ऊंची कूद, कबड्डी,डंबल आदि पर लोग हाथ आजमाते रहते थे। नाग पंचमी पर दंगल और खेलों में अपने मुहल्ले की टीम को जिताने की होड़ लगी रहती थी। इसमें युवकों के साथ बुजुर्ग भी शामिल हो जाते थे मगर अब पारंपरिक खेलों की जगह मोबाइल,टीवी एवं कम्प्यूटर ने ले लिया है।85 वर्षीय इं.गणेशी पाण्डेय बताते हैं कि पहले स्कूलों में नाग पंचमी पर अवकाश होता था सरकार ने इसकी परंपरा को ही खत्म कर दिया है। वैसे भी अखाड़ों की जगह अब जिम ने ले ली है। अब सेहत बनाने के बजाय लोग शरीर सौष्ठव पर ध्यान दे रहे है।







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