स्वतंत्रविचार 24 (रिपोर्ट :-- पियुष सिंह)
झाड़-झंखाड़ से पटी नहर,विभाग बेखबर।
रतसर (बलिया) सिंचाई के लिए जिले में नहरों का जाल बिछा है, लेकिन सफाई न होने से नहरों की स्थिति बदहाल है। माइनरों से हेड से टेल तक पानी पहुंचना कोरी कल्पना मात्र है। रतसर- सुखपुरा माइनर सफाई न होने से दोनों पटरियां झाड़-झंखाड़ से पटी हैं। सफाई के नाम पर खानापूर्ति कर रकम डकार लिया जाता है। जिसके कारण धान की रोपाई को लेकर किसानों को सिंचाई की चिंता सता रही है। तीन दर्जन से अधिक गांवों के किसानों की सिंचाई इसी नहर के भरोसे है। वहीं नहर के पटरियों से गुजरने वाले वाहनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जनऊपुर के किसान प्रेम नारायण पाण्डेय ने कहा कि किसानों की चिंता करने वाला कोई नही है। अभी तक माइनर में टेल तक पानी न पहुंचने से डीजल फूंक रोपाई करना मजबूरी हो गया है। अच्छी तरह नहर की सफाई न होने से किसानों को खेतों तक पानी पहुंचने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। जगदेवपुर के किसान किशुन कुमार पाण्डेय ने कहा कि माइनर की सफाई न होने से किसानों को सिंचाई में परेशानी झेलनी पड़ती है। इस बावत अवर अभियन्ता प्रशांत सिंह ने बताया कि नहरों की सफाई हर साल अक्टूबर - नवम्बर में कराया जाता है। बरसात में दोनों पटरियों पर झाड़ -झंखाड़ उग आए है उसे विभाग द्वारा एक पखवारे के अन्दर मजदूर लगाकर दवा का छिड़काव करा दिया जाएगा ताकि संक्रमित घास से जन मानस को कोई परेशानी न हो।







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