(बलिया) आज पूरा देश प्रथम उपराष्ट्रपति तथा द्वितीय राष्ट्रपति, दार्शनिक, शिक्षाविद, डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिवस के रूप में बड़ी धूम धाम से मना रहा है। जयंती तथा शिक्षक दिवस की इस कड़ी में अवध बिहारी सिंह महाविद्यालय करमानपुर, बलिया में डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया गया।
डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन की प्रतिमा पर माल्यापर्ण एवं पुष्पार्चन करने के पश्चात अवध बिहारी सिंह महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ सुनील कुमार सिंह ने उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला । उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि शिक्षक सृजन का ही दूसरा नाम है। शिक्षक केवल एक शिक्षक नहीं होता बल्कि वह युग निर्माता होता है । सृजन और प्रलय के बीच जीता हुआ, सादगी का एक पुतला । शिक्षक अगर सृजन के बीज बो सकता है तो अहंकारी सत्तापक्ष के अहंकार को चूर भी कर सकता है । आचार्य कौटिल्य ने इसे सिद्ध भी किया है । सत्ता में होते हुए भी जो सहज, सरल और सज्जन बना रहे वह केवल एक शिक्षक हो सकता है । सादगी का जीवन जीने वाले शिक्षकों के सिरमौर्य सर्वोच्च पद पर आसीन डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने इसे चरितार्थ किया है । जीवन के विभिन्न विसंगतियों के बीच भी शिक्षक सदैव एक शिक्षक ही बना रहता है । अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए वह राष्ट्र को एक नई दिशा देता है । 'शिक्षक दिवस' के इस शुभ अवसर पर एस.डी.एस. कान्वेंट हुसेनाबाद के निदेशक हस्त राज सिंह , महाविद्यालय के प्रवक्ता अनन्त कुमार यादव, प्रवक्ता जितेन्द्र वर्मा, प्रवक्ता प्रतिभा पाण्डेय, राजेश वर्मा, मनीष सिंह, पूनम, सोनू सिंह, आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक सुनील सिंह "मन्टन" ने अपने महाविद्यालय परिवार के सभी शिक्षको एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर शुभकामनाएं दी।
मोo अहमद हुसैन "उर्फ जमाल आलम







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