स्वतंत्रविचार 24 (रिपोर्ट :-- अहमद हुसैन उर्फ जमाल आलम)
गंगा दशहरा पर पतित पावनी सलिला के तट पर स्नान करते श्रद्धालु।
: गंगा दशहरा पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी।
बलिया गंगा दशहरा पर बृहस्पतिवार को हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। पुराणों में महर्षि भृगु ऋषि की नगरी में गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि गंगा दशहरा के दिन आस- पास के जनपदों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु महर्षि भृगु की नगरी में गंगा स्नान करने के लिए आते है। बृहस्पतिवार को ब्रह्ममुहुर्त में ही शहर से सटे महावीर घाट,विजयीपुर घाट,कीनाराम घाट, माल्देपुर संगम आदि घाटों पर बाइक,ई-रिक्शा और पैदल पहुंचे महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे के उद्घोष के बीच ताप व शाप विमोचन के लिए पतित पावनी में श्रद्धा की दस डुबकी भी लगाई और हवन-पूजन कर मंगल कामना के लिए पतित पावनी से प्रार्थना की। इसके बाद मन्दिरों में दस प्रकार के फल-फूल चढ़ाकर रसदार फल,शीतलता प्रदान करने वाले सत्तू,गुड़ आदि भी पुरोहितों को दिया। जनऊपुर निवासी ज्योतिषाचार्य डा०परमहंस पाण्डेय ने बताया कि जेठ शुक्ल पक्ष गंगा में स्नान करने वालों को न सिर्फ मन की शांति मिलती है,बल्कि मनोवांछित फल भी प्राप्त होता है। इस दिन दान करने विशेष महत्व है। गंगा दशहरा के दिन पतित पावनी सलिला के तट पर स्नान मात्र से ही दस प्रकार के जाने-अनजाने में हुए पापों का शमन भी हो जाता है।







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