Ad Code

Responsive Advertisement

श्रद्धा व विश्वास ना हो तो परमात्मा का पूजा करना व्यर्थ है - महाराज बुलेट बाबा

 

स्वतंत्रविचार 24 (रिपोर्ट :-- संदीप कुमार गुप्ता)

श्रद्धा व विश्वास ना हो तो परमात्मा का पूजा करना व्यर्थ है - महाराज बुलेट बाबा

दुबहर (बलिया)- रामचरितमानस में तुलसीदास जी कहते है कि " मानही मातु-पिता नहीं देवा। साधुन्ह सन करवावहिं सेवा ।। अर्थात जो व्यक्ति अपने माता पिता को ईश्वर के समान नहीं मानता और साधु तथा  सज्जन पुरुषों से सेवा करवाता है। ऐसे आचरण वाला व्यक्ति राक्षस कहलाता है। उक्त बातें ग्राम सभा अड़रा में श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर के निकट आयोजित श्री हनुमत महायज्ञ के पांचवे दिन बुधवार की संध्या को अयोध्या से पधारे कथावाचक शक्तिपुत्र महाराज (बुलेट बाबा) द्वारा संगीतमय राम कथा के प्रवचन के दौरान कहा गया। उन्होंने कहा कि भगवान की पूजा श्रद्धा और विश्वास से हो तो करना चाहिए। यदि श्रद्धा और विश्वास ना हो तो परमात्मा का पूजा करना व्यर्थ है। परमात्मा के लिए एक लोटा जल और एक फूल ही पर्याप्त होता है। उन्होंने कहां की महायज्ञ में 108 बार परिक्रमा करके मनवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है। यदि जिसके घर में ' कलह और अशांति ' का माहौल बना हो तो  मन में सुख,शांति को स्मरण करके परिक्रमा करें तो घर में शांति होगी। और यदि केस, मुकदमा से परेशान हो तो मूंगफली के दाना से परिक्रमा करें तो उसे मनवांछित सफलता प्राप्त होगी। यदि किसी का पुत्र न हो तो ईश्वर से पुत्र रत्न की प्राप्ति की कामना करें तथा फल या वेलपत्र पर सीताराम लिखकर परिक्रमा करें तो उसे पुत्र रत्न प्राप्ति का योग बनेगा। यदि किसी मनुष्य का विवाह न हो रहा हो, किसी ग्रह, नक्षत्र के कारण कट जा रहा हो, तो उसे पीला अक्षत लेकर परिक्रमा करना चाहिए।  यदि जो व्यक्ति रोग व्याधि से ग्रसित हो उसे अपने ललाट से लेकर पैर के अंगूठे तक काला धागा माप कर परिक्रमा करें तो उसे ईश्वर की कृपा से रोग व्याधि से मुक्ति मिलती है।