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अब तक पुलिस के हाथ खाली, पत्रकारों में रोष व्याप्त
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रसड़ा (बलिया) स्थानीय नगर के प्यारेलाल चौराहा पर जन विश्वास यात्रा के दौरान समाचार कवरेज़ करते समय दैनिक अमर उजाला के पत्रकार संतोष कुमार सिंह का पॉकेट मारो ने उनके जेब से ₹ 36580/- पर हाथ साफ कर दिया। इस घटना की जानकारी पत्रकार श्री सिंह को तब हुई जब वो एक दुकान पर खरीदे गए अपने समान का भुगतान करने को पैसा निकालने हेतु अपने पॉकेट में हाथ डाले। पाकेट से रुपया गायब होना देख पत्रकार के होश उड़ गये। इसी बीच आनन फानन में पीड़ित पत्रकार ने कोतवाल राजीव सिंह एवम नवागत सिटी इंचार्ज रविन्द्र पटेल को दूरभाष पर सूचना दिया, परंतु नतीजा शून्य रहा और आज तक पाकेटमार को पकड़ने और रुपया बरामद करने में पुलिस नाकाम ही साबित हो रही है। उक्त घटना से जहां पत्रकारों में रोष ब्याप्त है, वहीं आयदिन होने वाले इस तरह की घटनाओं से पीड़ित स्तभ हैं और पुलिस मूक दर्शक है। पत्रकार के साथ घटित इस वारदात की घोर निन्दा करते हुए भारतीय पत्रकार संघ तहसील अध्यक्ष रवि आर्य सहित पत्रकारों ने कहा कि शहर के मुख्य चौराहा प्यारेलाल पर जहां स्थापित पुलिस बूथ पर हर समय पुलिस की मौजूदगी रहना और बाज़ार के तिराहों और चौराहों पर पुलिस व होमगार्डों की ड्यूटी लगना एवं सी.सी.कैमरों में हर गतिविधियों का कैद होने बावजूद इस तरीके से पॉकेटमारी और उचक्कागिरी की घटनाओं का होना और अपराधी पुलिस पकड़ से बाहर रहना कहीं न कहीं से पुलिस सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर अनेकों प्रकार के सवालों को जन्म देना स्वभाविक है, जिसपर चिंतन और मंथन करना पुलिस अफसरान का नैतिक और प्रशासनिक कर्तब्य तो बन ही जाता है ? सरकार व सरकारी तंत्र के लोग कानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भले ही रातों दिन ताल ठोकने और अपनी पीठ थपथपाने में मस्त हैं, पर हकीकत में धरातल का नज़ारा इसके पलट ही है, तभी तो नगर व क्षेत्र में निर्भीक घूम रहे पॉकेटमारों एवम उच्चक्कों और अपराधियों की बल्ले बल्ले है? फिर भी सभी की नज़र अब इस पर है कि पत्रकार के साथ घटित उक्त पाकेटमारी घटना के आरोपी की गिरफ्तारी और रपयों की बरामदगी हो हो पाती है या नहीं ?
रिपोर्ट :-- हाजी वकील अहमद अंसारी






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