Ad Code

Responsive Advertisement

 


नगरा (बलिया)। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने केंद्र सरकार ने बैंकों के निजीकरण के लिए संसद के मौजूदा सत्र मे बैंक राष्ट्रीय करण कानून मे संसोधन हेतू प्रस्ताव लेकर आ रही है जिसके विरोध में बैंकों पर ताला लटक गया है और सभ कर्मचारी दो दिवसीय हड़ताल पर चले गये हैं। बृहस्पतिवार को नगरा क्षेत्र के बैंको में काम काज ठप रहा। इसके मुताबिक सरकार दो बैंकों में अपनी 51 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकती है। और बैंक को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। सरकार के इस कदम के विरोध में यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के अहवान पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अधिकारी एवं कर्मचारी हड़ताल पर 16 व 17 दिसम्बर को दो दिवसीय हड़ताल पर है. यूनियन बैंक आफ इंडिया, सेन्ट्रल बैंक आफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया आदि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजी करण का प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं इनके निजी करण से देश का आर्थिक और सामरिक ढांचा चरमरा जाएगा तथा अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने आम जनमानस की आशाओं एवं अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य किया है तथा सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी बैंकिंग सुविधाओं को मुहैया कराया है इनके निजी करण से बैंकिंग सेवाएं आम जनमानस के पहुंच से बाहर हो जाएंगे।



रिपोर्ट :-- ओम प्रकाश वर्मा